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एयरफोर्स में प्रवेश के बाद राफेल लड़ाकू विमान उड़ाने की कामयाबी और शिवांगी के सपनों की उड़ान

महिलाओं की प्रगति उनके बढ़ते अधिकारों के प्रतीक हैं. महिलाएं सारी वर्जनाएं तोड़कर नित नया इतिहास लिख रही हैं. जिंदगी के हर मोड़ हर और क्षेत्र में महिलाओं की सफलता छुपी नहीं है. अब भारतीय सेना भी नारी के सशक्त स्वरूप का गवाह बन रही है. फ्लाइट लेफ्टिनेट दुनिया की सर्वोत्तम श्रेणी के युद्धक विमानों में एक राफेल की पहली महिला पायलट बनने जा रही हैं. राफेल जैसे ही भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल मिग-21 ‘बाइसन’ की जगह लेंगे, शिवांगी इस भूमिका में आ जाएंगी. क्या गजब संयोग है कि पिछले साल दिसंबर में शिवांगी नाम की ही एक और महिला भारतीय नौसेना की पहली महिला पायलट बनी थीं जो बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली हैं

देश के सबसे ताकतवर फाइटर विमान राफेल स्क्वाड्रन गोल्डन ऐरो के लिए विशेषज्ञ पायलट के प्रशिक्षण के लिए शिवांगी को शामिल किया गया है.  लगन और अनवरत प्रयास हो तो लक्ष्य पाना मुश्किल नहीं है. वाराणसी के फुलवरिया गांव में रहने वाली शिवांगी सिंह ने इसे कर दिखाया है. वायु सेना में फाइटर विमान उड़ाने का सपना पाला और लीक से हटकर इसी के लिए जी-तोड़ मेहनत की.  फुलवरिया रेलवे क्रासिंग के निकट तीन दशक पुराने मकान में शिवांगी की मां सीमा सिंह, पिता कुमारेश्वर सिंह, भाई मयंक सिंह, शुभांशु, हिमांशी, बड़े पिता राजेश्वर सिंह, बड़ी मां बेटी की उपलब्धि पर खुशियां मनाने में जुटा था.

पिता कुमारेश्वर की खुशी का ठिकाना नहीं है क्योंकि उनकी बेटी देश की पहली और इकलौती पायलट है जो वायु सेना के बेड़े में शामिल हुए राफेल के गोल्डेन ऐरा की टीम में शामिल हुई है.  शिवांगी वायु सेना का फाइटर विमान मिग -21 बाइसन उड़ाती हैं. वह राफेल के लिए अंबाला में तकनीकी प्रशिक्षण ले रही थीं.

 

पड़ोसियों के मनाई खुशियां
बेटी की सफलता की जानकारी पर पास-पड़ोस के बच्चे और बुजुर्ग भी पहुंचे. घर हलवा बना और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर खुशियां जताई गई. पड़ोस के शुभम सिंह, मल्लिका सिंह, कृष्णकांत सिंह, जाह्नवी सिंह, आदित्य सिंह का कहना था कि दीदी हमारे लिए ही नहीं, हर एक युवा के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं.

एयरफोर्स म्यूजियम में ही बनाया था लक्ष्य
शिवांगी के नाना कर्नल वीएन सिंह सेवानिवृत्ति के बाद नई दिल्ली में रहने लगे. वहां अक्सर शिवांगी अपनी मां व भाई के साथ जाती थीं. मां सीमा सिंह बताती हैं, हाई-स्कूल की पढ़ाई के दौरान पिताजी नई दिल्ली में बच्चों को एयरफोर्स का म्यूजियम दिखाने गये. वहां एयरफोर्स के विमान और वायु सैनिकों की ड्रेस देखकर शिवांगी रोमांचित हो गई. वहीं नाना से बोली कि उसे भी वायु सेना में जाना है. ऐसी ही ड्रेस पहननी है और ये फाइटर विमान भी उड़ाना है. इसके बाद यहीं से जीवन का लक्ष्य तय कर लिया।

बच्चों की परवरिश के लिए मां ने सरकारी नौकरी छोड़ी
मां सीमा सिंह ने बच्चों की परवरिश के लिए नौकरी छोड़ दी. साल 2007 में उनका चयन सरकारी शिक्षिका के रूप में हुआ. बच्चे पढ़ रहे थे, उन्हें लगा कि नौकरी करने पर बच्चों की बेहतर परवरिश और पढ़ाई में अड़चन आयेगी. इसलिए उन्होंने नौकरी नहीं की. पिता कुमारेश्वर सिंह ने बेटी की हर इच्छा पूरी की. पढ़ाई के दौरान कोई कमी नहीं आने दी.

मेधावी रहीं शिवांगी
शिवांगी पढ़ाई और खेल में भी अव्वल रहीं. आठवीं तक की पढ़ाई कैंटोंमेंट स्थित सेंट मेरीज से की. इंटर तक की पढ़ाई शिवपुर स्थित सेंट जोजर्स कॉन्वेंट स्कूल बाईपास से की. विज्ञान वर्ग से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की और 89 फीसदी अंक अर्जित कीं. सनबीम वुमेंस कॉलेज भगवानपुर से बीएससी की पढ़ाई पूरी की. उन्होंने 68 फीसदी अंक पाये थे. बीएससी की पढ़ाई के दौरान ही एनसीसी ज्वाइन की.

बास्केटबाल में हमेशा अब्वल रहीं
मां सीमा सिंह ने बताया कि बेटी खेल में भी आगे रहती थी. स्कूल के लिए उसने नेशनल स्तर तक की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया. उसका ड्रिल लड़कों से भी बेहतर था. इसलिए हर हर बार टीम में चुनी जाती और उसकी बदौलत टीम जीतती थी. जैवलिन थ्रो में भी उसने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता.

बीएतयू से हुई शिवांगी सिंह की पढ़ाई
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से पढ़ी-लिखीं फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिवांगी सिंह महिला पायलटों के दूसरे बैच की हिस्सा हैं जिनकी कमिशनिंग 2017 में हुई. भारतीय वायुसेना के पास फाइटर प्लेन उड़ाने वाली 10 महिला पायलट हैं जो सुपरसोनिक जेट्स उड़ाने की कठिन ट्रेनिंग से गुजरी हैं. एक पायलट को ट्रेनिंग पर 15 करोड़ रुपये का खर्च आता है.

अभिनंदन वर्तमान के साथ उड़ा चुकी हैं मिग फाइटर प्लेन
फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिवांगी सिंह पहले राजस्थान के फॉरवर्ड फाइटर बेस पर तैनात थीं जहां उन्होंने विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान के साथ उड़ान भरी थी. बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद भारतीय हवाई सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे पाकिस्तानी फाइटर जेट का पीछा कर रहे अभिनंदन वर्तमान का मिग-21 विमान ही पाकिस्तानी सीमा में जा गिरा था और पाकिस्तान ने उन्हें बंदी बना लिया था. हालांकि, भारत की चेतावनियों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण पाकिस्तान को उन्हें ससम्मान रिहा करना पड़ा था.

 इटर जेट उड़ाने वाली महिलाओं का पहला बैच 
फ्लाइट लेफ्टिनेंट अवनी चतुर्वेदी, फ्लाइट लेफ्टिनेंट भावना कांत और फ्लाइट लेफ्टिनेंट मोहना सिंह भारतीय वायुसेना में बतौर फाइटर जेट उड़ाने वाली महिला पायलटों के पहले बैच में शामिल थीं. उन्हें जून 2016 में इसकी बेसिक ट्रेनिंग दी गई थी.  इन महिलाओं ने ही सशस्त्र बलों के युद्धक अभियानों से महिलाओं को बाहर रखने की नीति को धता बताते हुए नया इतिहास रचा था.

महज तीन साल में लगाई एक और छलांग
शिवांगी ने महज तीन साल में लंबी छलांग लगाई। साल 2015 में उन्होंने वायु सेना की परीक्षा पास की. इसके बाद डेढ़ साल तक प्रशिक्षण चला। प्रशिक्षण के बाद दूसरे बैच में साल 2017 में उन्हें देश की पांच महिला फाइटर विमान की पायलटों में चुना गया। अब तीसरे साल ही शिवांगी की काबीलियत देखते हुए उन्हें राफेल की टीम में चुना गया.

शिवांगी की उपलब्धि पर बधाई देनें वालों का सोशल मीडिया पर तांता लग गया है. शिवांगी की उपलब्धि बेटियों के लिए नजीर है. साथ ही बेटियों के प्रति अलग सोच रखने वाले लोगों के लिए भी एक उदाहरण है। और बड़ी उपलब्धि पाने के लिए बनारस की बेटी शिवांगी को शुभकामनाएं अमित पाठक, एसएसपी वाराणसी

बनारस की बेटी शिवांगी ने इतिहास रचा है. खासतौर से सेना में जहां खुद को साबित करना कठिन होता है, वहां शिवांगी राफेल की पायलट टीम में चुनी गईं. उन पर पूरे देश को नाज है. – नरेंद्र पाल सिंह, कमांडेंट, 95 बटालियन, सीआरपीएफ

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