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करौली में मृतक के परिजनों को मिला मुआवजा, हाथरस कांड की होगी सीबीआई जांच

जैसे ही राजस्थान के करौली में साधु की हत्या के बाद राजनीतिक माहौल गर्म होना शुरू हुआ सीएम अशोक गहलौत ने ले देकर सारा मामला सुलझा लिया. 10 लाख का मुआवजा और एक नौकरी देने की बात मानने के बाद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन बंद किया. साधु का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

लेकिन यूपी के हाथरस का मामला शांत नहीं हो रहा था. ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी नई चाल चली. बताया जा रहा है कि सीएम की सिफारिश के बाद हाथरस में दलित युवती के साथ हुए कथित गैंगरेप और मौत केस को अब सीबीआई ने टेकओवर कर लिया है. केंद्रीय जांच एजेंसी जल्द ही मामले में जांच शुरू कर देगी.  अधिकारियों ने शनिवार देर शाम इस बात की जानकारी दी.  बता दें कि 14 सितंबर को 19 वर्षीय दलित युवती के साथ कथित तौर पर चार युवकों ने गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया था और पीड़िता  की 29 सितंबर को मौत हो गई थी.

14 सितंबर को हुए इस घटना के बाद पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गैंगरेप की धारा में मामला दर्ज कर लिया था. चारों आरोपी फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में हैं. घटना के बाद पीड़िता कई दिनों तक बेसुधी के हालत में रही. तबीयत बिगड़ने के बाद उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था, जहां पर 29 सितंबर को उसकी मौत हो गई.

मौत के बाद पीड़िता के शव को लेकर परिजन उसी दिन हाथरस चले गए. यहां पर 29-30 सितंबर की दरम्यानी रात पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया गया. परिजनों ने आरोप लगाया कि हमें अंतिम समय में अपनी बच्ची को देखने नहीं दिया गया और प्रशासन ने पुलिसिया पहरेदारी में रात 2.30 बजे अंतिम संस्कार कर दिया. गैंगरेप और पुलिस-प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ चल रहा प्रदर्शन रात में अंतिम संस्कार किए जाने की घटना के बाद और तेज हो गया.

विरोध बढ़ता देख सरकार ने एसआईटी जांच बिठा दी. तीन सदस्यीय एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर यूपी सरकार ने हाथरस पुलिस अधीक्षक, डीएसपी, इलाके के इंस्पेक्टर सहित अन्य अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था.  इनके कामों में लापरवाही की बात सामने आई थी

योगी सरकार के इस फैसले पर पीड़िता के परिवार ने कहा था कि हमने सीबीआई से जांच की मांग नहीं की थी, क्योंकि पूरे प्रकरण की जांच अभी एसआईटी कर रही है. परिजनों की मांग थी कि सरकार हाथरस डीएम को निलंबित करे और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की देखरेख में मामले की जांच कराए.

जिस तरीके से आझकल हत्या के मामले का राजनीतिकरण हो रहा है उसे लोकतंत्र के लिए कतई बेहतर नहीं कहा जा सकता है. हाल ही महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में जो घटनाएं हुई है औऱ प्रशासन का लचर रोल देखने को मिला है वह आने वाले समय में सामाजिक अशांति पैदा कर सकता है.

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