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नीतीश कुमार बड़े भाई मैटेरियल हैं, फ़ार्मूला फिफ्टी-फिफ्टी का ही रहेगा

राजनीति में मुलाकातों का सिलसिला चलता रहता है. लोगों की निगाहें जमीं रहती है. लेकिन हकीकत पर से पर्दा उठने में थोड़ा वक्त लगता है. सियासत का खेल अजीव है. कभी कभी खेल-खेल में बड़ी बातें हो जाती है. आज बीजेपी में बिहार की सियासत पर हलचल देखने को मिली. घंटे भर तक सीएम नीतिश के घर पर मंथन चलता रहा. लेकिन सीटों के बंटवारे पर कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया. वही लोक जनशक्ति पार्टा को लेकर भी कोई चर्चा नहीं हुई. बैठक का मतलब साफ था  कि जल्द ही कुछ फाइनल कर लिया जाएगा, लेकिन इतना तय है कि चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा.

नीतीश के घर हुई बैठक में जेडीयू सांसद ललन सिंह के अलावा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल, डिप्टी सीएम सुशील मोदी, बीजेपी महासचिव भूपेंद्र यादव मौजूद रहे वहां बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी बैठक में पहुंचे. चाय पर भी चर्चा हुई. लेकिन सीटों के फ़ार्मूले पर कोई बात नहीं हुई. जेडीयू कितनी सीटों पर लड़ेगी ? या फिर बीजेपी को कितनी मिलेंगी ? लोक जनशक्ति पार्टी और जीतन राम मांझी का क्या करें? इन सब सवालों पर तो किसी ने कोई चर्चा तक नहीं की.  वैसे नीतीश कुमार की ये कूटनीति होती है कि वे खुद सीटों को लेकर बातचीत नहीं करते हैं.

फाइल फोटो:  सीएम नीतीश कुमार और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा

दरअसल, सीएम नीतीश कुमार मुद्दों से भटक कर बातचीत करते रहे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बीजेपी नेताओं को बताते रहे कि कोरोना काल में क्या क्या काम हुआ. लॉकडाउन में बाहर से आए 32 लाख लोगों के लिए क्या किया गया ? सबको राशन और बर्तन दिए गए. कई लोगों को नौकरियां दी गईं. मनरेगा में ज़रूरतमंद लोगों को काम दिया गया. नीतीश ने कहा कुछ लोग बयान देते रहते हैं. चिट्ठी लिखते रहते हैं. हमने कभी इस पर कुछ नहीं कहा. लोगों का काम है बयान देना वो देते रहते हैं. नीतीश का इशारा चिराग़ पासवान की तरफ़ था. लेकिन उन्होंने चिराग़ का नाम नहीं लिया.

नीतीश लगातार अपनी सरकार के काम काज का बखान करते रहे.. उन्होंने बिहार में सामाजिक समीकरण की विस्तार से चर्चा की. बीजेपी महासचिव और पार्टी के प्रभारी भूपेन्द्र यादव को उन्होंने राज्य का दौरा कर काम काज देखने को कहा.

ठीक दस सालों बाद बीजेपी और जेडीयू मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगी. 2010 में दोनों साथ साथ लड़े थे. 2010 में एनडीए को 243 में से 206 सीटें मिली थीं. जेडीयू को 115 और बीजेपी को 91 सीटें मिली थीं. लोक जनशक्ति पार्टी तब आरजेडी के साथ गठबंधन में थी. 2015 के चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी और बीजेपी का गठबंधन था. जबकि नीतीश कुमार ने लालू यादव और कांग्रेस के साथ मिल कर महागठबंधन बना लिया था.

इस बार जेडीयू, बीजेपी के साथ साथ लोक जनशक्ति पार्टी भी एनडीए में है. गृह मंत्री अमित शाह से लेकर बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा तक कह चुके हैं कि नीतीश कुमार ही सीएम उम्मीदवार होंगे. बिहार चुनाव में वे एनडीए का चेहरा होंगे. पीएम  नरेंद्र मोदी ने भी तारीफ कर दी है. लेकिन चिराग़ पासवान कुछ नाराज हैं. नीतीश से उनकी बन नहीं पा रही है. केंद्रीय मंत्री रामबिलास पासवान कह चुके हैं कि वे बेटे के हर फ़ैसले में उसके साथ हैं. जीतन राम मांझी को साथ लेने से भी चिराग़ नाराज़ हैं

अब बात कर लेते हैं गठबंधन की, सवाल ये है कि बिहार में गठबंधन का स्वरुप क्या होगा. सीटों का फॉर्मूला क्या होगा ? बीजेपी को कितनी सीटें मिलेंगी ? मौसम वैज्ञानिक रामबिलास पासवान का क्या स्टैड होगा ? इन सवालों पर से पर्दा उठना अभी बाकी है. लोकसभा में बीजेपी-जेडीयू 17-17 सीटों पर लड़ी थी. एलजेपी को 6 सीटें मिली थी. इस बार भी नीतीश बड़े भाई के तौर पर ही रहेंगे. जेडीयू 115 सीटें पर लड़ने की बात कर रही है. वो हर हाल में बीजेपी से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है.

बीजेपी और जेडीयू ने मोटे तौर पर अपनी अपनी लिस्ट बना ली है. अभी पत्ते खुलना बाकी है इसलिए थोड़ा इंतजार जरुरी है. नतीश कुमार जानते हैं कि सीएम तो वही बनेंगे इसलिए 2 -4 सीटों कू कुर्बानी भी दे सकते है. फिलहाल थोड़ा इंतजार अभी औऱ बाकी है. लेकिन एलजेपी को लेकर संशय बरकरार है क्योंकि उसने अभी पत्ते नहीं खोले है.

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