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‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ 21 सदी की आकांक्षाओं को आगे ले जाने में सक्ष्म होगी

राष्ट्रीय शिक्षा नीति कैसी हो ? उसका स्वरुप क्या हो ? इसके लिए अब देश आगे बढ़ रहा है.  राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर व्यापक विचार विमर्श हो रहा है संवाद हो रहा है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति पढ़ाई लिखाई में बदलाव के साथ 21वीं सदी के भारत की सामाजिक और आर्थिक  जीवन को नई दिशा देने वाली है. ये पॉलिसी आत्मनिर्भर भारत के संकल्पों और सामर्थ्य को आकार देने वाली है. इसके लिए सरकार की जागरूकता और तैयारी उतनी ही बड़ी होनी चाहिए. इतने बड़े लक्ष्य पर निरंतर बात करना अति आवश्यक है, तभी देश नई शिक्षा नीति को सफलतापूर्वक लागू कर पाएगा.

नई शिक्षा नीति 2020 के वर्चुअल सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति आज के संदर्भ में बहुत प्रासंगिक है.  इस नीति में शिक्षा जगत के सैंकड़ों वर्षों का अनुभव समाहित है. देश की आकांक्षाओं को पूर करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति महत्वपूर्ण होती है. शिक्षा नीति और शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय निकायों से जुड़े होते है. उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति में सरकार का दखल और  उसका प्रभाव कम से कम होना चाहिए. शिक्षा नीति के साथ जितनी ज्यादा संख्या में छात्रछात्राएं, शिक्षक और अभिभावक जुड़ेंगे उसकी प्रासंगिकता उतनी ज्यादा होगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी जी ने दुनिया में तेजी से बदल रही परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि आज दुनिया बड़ी तेजी से बदल रही है और वर्तमान में शिक्षा की चुनौतियों को स्वीकार करना होगा. तेजी से बदलते परिवेश में नौकरी को लेकर व्यापक रुप से चर्चा हो रही है. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020  लोगों को ज्ञान और स्किल के लिए तैयार करता है. सिखने पर फोकस करती है. इस नीति में प्रोसेस से ज्यादा पैशन और फाउंडेशनल लर्निंग पर जोर दिया गया है.   टीचर ट्रेनिंग पर भी फोकस किया गया  है.. सभी छात्रों को विकास का रास्ता दिखाया गया है. पीएम  ने कहा कि बीते दशकों से जो भी कमियां दिखती थी उनको दूर करने के लिए विस्तार से इस पॉलिसी में चर्चा की गई है.  आज हमारे बच्चे बैग के  बोझ  और सामाजिक दवाब के तले दबते जा रहे  है. इस पॉलिसी में इस समस्या का प्रभावी तरीके से उपाय  निकाला गया है. ‘सा विद्या या विमुक्तयेयानि ज्ञान वही है जो हमारी मस्तिष्क को आजादी प्रदान करे. राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बिना दवाब, बिना प्रभाव के सीखने के लोकतांत्रिक व्यवस्था पर जोर दिया गया है. नई शिक्षा नीति में ऐसे प्रस्ताव हैं, जो ठोस सार्वजानिक शिक्षा प्रणाली में निवेश के साथ साथ निजी एवं सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं. आत्मनिर्भर भारतअभियान के तहत नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने में वर्तमान एवं भविष्य की चुनौतियों को दूर करने के लिए तकनीकी का लाभ उठाने पर जोर दिया गया है. बच्चों को प्राथमिक स्तर पर  भाषा, संस्कृति से परिचय कराया जाएगा ताकि उनके मनमस्तिष्क का तेजी से विकास हो.

उन्होंने कहा कि सरकार की शिक्षा नीति में 30 साल के बाद व्यापक परिवर्तन किए गए हैं आज तकनीकी का विकास गांव से गांव तक हो रहा है और सूचनाओं का प्रभाव बढ़ रहा है. वीडियो स्ट्रीमिंग पर बेहतरीन से बेहतरीन चैनल चलाये जा रहे हैं जिससे शिक्षा व्यवस्था में असंतुलन कम हो रहा है. हमारी जिम्मेदारी ये है कि हम हर विश्विदियालयों में तकनीकी व्यवस्था को अधिक से अधिक बढ़ावा दें. जब किसी भी सिस्टम में इतने व्यापक बदलाव होते हैं तो कुशंकाएं स्वभाविक है. शिक्षा मंत्रालय में संवाद लगातार जारी है. हम सभी को मिलकर तमाम शंकाओं का समाधान करना है. सभी लोगों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि नई शिक्षा नीति  2020  के कार्यान्वयन के लिए  25 सितंबर से  पहले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वर्चुअल कॉन्फ्रेंस शुरू किया जाए

वही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि ये शिक्षा नीति लंबी प्रक्रिया के बाद बनाया गया है. यह 21 सदी की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को आगे ले जाने में सक्ष्म होगी. देशभर में शिक्षाविदों और सामान्य लोगों ने इसका स्वागत किया है . अगर इस शिक्षा नीति के अनुरुप बदलाव कर लिए जाते हैं तो भारत शिक्षा के क्षेत्र में महाशक्ति बन जाएगा.  उन्होंने कहा कि इस मसौदे को तैयार करने में ढाई लाख ग्राम पंचायतों, 6 हजार 600 प्रखंडों, 600 अपर प्रखंडों और 676 जिलों के लोगों से परामर्श लिया गया है. मानव संसाधन मंत्रालय ने जनवरी 2015 में ही नई शिक्षा नीति पर काम शुरू कर दिया था.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

जहां तक संवैधानिक मूल्यों को अपनाने की बात है तो इस नीति में कहा गया है कि आज के दौर में तेजी से बदलती दुनिया में छात्रों को बेहतर, सफल, इनोवेटिव और गुणात्मक बनने के लिए संवैधानिक मूल्यों को सीखना जरूरी है. छात्रों को भारतीय संविधान की मुख्य बातों  को आवश्यक रूप से पढ़ाने पर विचार किया जाएगा नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए राज्यपालों को योगदान देना है.  राज्य विश्वविद्यालयों के उपर एक विशेष जिम्मेदारी दी गई है.

सामाजिक न्याय और उन्नति  सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा होती है…1968 से इस नीति तक निरंतर ये स्पस्ट किया गया है कि इसमें 6 प्रतिशत जीडीपी का लक्ष्य रखा जाना चाहिए.  विद्यार्थियो में बदलते विश्व में अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए है. सार्वजिनक शिक्षा प्रणाली ही जीवन का आधार होती है.   शिक्षण औऱ पठन पाठन, अनवेक्षण, और तार्कितता पर आधारित होनी चाहिए, शिक्षा नैतिकता और उच्म आदर्शों पर आधारित होनी चाहिए.   नई शिक्षा नीति का उद्देश्य  भविष्य के मूल्यों पर आधारित आधुनिक शिक्षा प्रणाली विकसित करना है. उच्चतर शिक्षा में प्रोफेसनल को तैयार करने पर बल दिया गया है..

वही शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक जी ने कहा कि शिक्षा किस समाज की आधारशिला होती है 34 वर्षों के बाद ये नई शिक्षा नीति आई है. नई शिक्षा नीति को समानता, जवाबदेही गुणवत्ता और समान अवसर को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए साल 2030 तक का लक्ष्य रखा गया है. भारत को सतत विकास और वैश्विक ज्ञान के जरिए महाशक्ति में बदलने का लक्ष्य है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति में निहित नैतिकता एक ऐसी शिक्षा प्रणाली जो भारत को बदलने में सीधे योगदान देती है, अर्थात नई शिक्षा नीति भारत को  एक उच्चगुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करके एवं वैश्विक महाशक्ति बनाने में मदद करेगी. यह पहली बार है कि शिक्षा नीति को व्यापक परामर्श से तैयार किया गया है. जितने भी सुझाव आए थे, उनको मंथन का हिस्सा बनाया गया है. इसमें लचीलापन और वैज्ञिक सोंच को बढ़ावा दिया गया है. भाषा हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा है. इसमें नवाचार औऱ ज्ञान विज्ञान, का समावेश है.

भारत को सस्ती और बेहतर शिक्षा प्रदान करने वाले वैश्विक अध्ययन केंद्र के रुप में बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे भारत को विश्व गुरु के रूप में अपनी भूमिका स्थापित करने में मदद मिलेगी.. दुनिया के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों को भारत में आमंत्रित किया जाएगी. इस तरह से शिक्षा को एक आधारभूत ढांचे के तहत लाया जाएगाभारतीय और वैश्विक संस्थानों के बीच अनुसंधान सहयोग और छात्रों के आदानप्रदान के विशेष प्रयासों को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके अलावा, विदेशी विश्वविद्यालयों में क्रेडिट अर्जित करने की अनुमति दी जाएगी. प्रत्येक एचईआई को सुविधा अनुसार डिग्री प्रदान करने की छूट होगी.

नई शिक्षा नीति के मसौदे को पद्म विभूषण डॉ के कस्तूरीरंगन जी की अध्यक्षता में तैयार किया गया है. जून 2017 में नई शिक्षा नीति ड्राफ्ट करने के लिए पद्म विभूषण और वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन के नेतृत्व में कमेटी गठित की गई जिसके बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 का मसौदा 31 मई को मानव संसाधन मंत्रालय में प्रस्तुत किया गया. इसके लिए उनका धन्यवाद ज्ञापन करता हूं.

हम एक विश्व नागरिक बनाने के ओर बढ़ रहे है. भारत ज्ञान की महाशक्ति बनेगा औऱ हमलोग प्रधानमंत्री जी के विजन को लेकर आगे बढ़ेंगे. हमार पास कंटेट औऱ टैलेंट भी होंगे. हम बहुभाषावादी औऱ आशावादी भी बनेंगे. हम इस नीति को बिना देरी के क्रियान्वयन को आगे बढ़ाएंगे. हम एक अच्छे भारत के निर्माण के लिए तैयार होंगे.

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