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क्रिकेट छोड़ नौकरी करना चाहते थे भज्जी: फिर कोलकाता स्टेडियम में बदली किस्मत…

नई दिल्ली: क्रिकेट जगत में हरभजन सिंह (भज्जी) का नाम कौन नहीं जानता है. अपनी गेंदबाजी के दम पर बल्लेबाजों के छक्के छुड़ा देने वाले हरभजन सिंह एक समय में क्रिकेट छोड़ कर कनाडा जाकर कुछ छोटा मोटा काम करने की प्लानिंग कर रहे थे. उस समय क्रिकेट में इतनी फीस नहीं मिलती थी कि घर का गुजरा भी सही से हो सके.

बतादें कि आज हरभजन सिंह की जन्मदिन है. ऐसे में उनके जीवन से जुड़ा एक रोचक किस्सा शेयर कर रहा हुआ है. 3 जुलाई 1980 को जन्मे हरभजन सिंह भारतीय क्रिकेट में एक अच्छा नाम बन चुके हैं, लेकिन एक दौर वह भी था कि लाख प्रतिभा होने के बाद भी वह क्रिकेट को छोड़ देना चाहते थे. समय था साल 2001 का, जब आईपीएल जैसा कुछ लोगों के दिमाग में भी नहीं आया था उस समय क्रिकेट में उन्हें इतना मौक़ा भी नहीं दिया जा रहा था और बीसीसीआई की तरफ से खिलाड़ियों को सालाना कॉन्ट्रैक्ट नही दिया जाता था. मैच फीस इतनी भी नहीं थी कि घर का खर्च सही से चल सके. पापा के गुज़र जाने के बाद परिवार का सारे दायित्व हरभजन सिंह पर था. ऐसे में क्रिकेट से घर का खर्च न चलता देख हरभजन सिंह कनाडा जाकर वहां जाकर कुछ छोटा मोटा काम करने की प्लानिंग करने लगे थे. लेकिन उनका यह प्लान फेल हो गया. क्योंकि सिकंदर की तरह पूरी दुनिया में जीत का झंडा लहराते हुए साल 2001 में ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत के खिलाफ सीरीज खेलने आई.

ऑस्ट्रेलिया स्टीव वॉ भारत के खिलाफ भी यह सीरीज जीतने की तैयारी कर चुके थे. तब उनकी तरफ से कहा गया था कि ये सीरीज ऑस्ट्रेलिया के लिए ‘फाइनल फ्रंटियर’ है. उस समय ऑस्टेलियाई टीम में स्टीव वॉ, एडाम गिलक्रिस्ट, शेन वार्न, ग्लेन मैक्ग्रा जैसे ‘धुरंधर’ खिलाड़ी थे. इसी सीरीज से हरभजन सिंह की ‘नई जिन्दगी’ शुरू हुई. वानखेड़े स्टेडियम में पहला टेस्ट मैच हुआ जहाँ भज्जी ने फर्स्ट इनिंग्स में 4 विकेट झटके, लेकिन मैच भारत जीत न सका. जिसके बाद सीरीज का दूसरा मैच कोलकाता में हुआ. जहाँ भज्जी ने कमला दिखा दिया. ईडन गार्डन में ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में हरभजन सिंह ने पोंटिंग, गिलक्रिस्ट और वार्न को लगातार तीन गेंदों में पवेलियन भेजकर इतिहास रच दिया.

इसी के साथ हरभजन सिंह टेस्ट में विकेट लेने की हैट्रिक लगा दी. तीन विकेट लेने के बाद ऑस्ट्रेलियाई पार कमजोर हो गयी लेकिन फिर भी उन्होंने विशाल स्कोर खड़ा किया और भारत को 171 रनों पर ऑलआउट करके फॉलोअन के लिए भेजा. दूसरी पारी में राहुल द्रविड़ और लक्ष्मण ने ऐतिहासिक पारी खेली और टेस्ट मैच जीतने के लिए भारत के सामने सिर्फ आखरी दिन के लगभग 70 ओवर का खेल बाकी था.  कप्तान सौरव गांगुली ने हरभजन सिंह से 30 ओवर गेंदबाज़ी करवाई. भज्जी दूसरी पारी में 6 विकेट लिए और मैच में कुल 13 विकेट लिए और भारत ने मैच अपने नाम कर लिया. इसी मैच से भारत को एक नया गेंदबाज मिल गया. हरभजन सिंह कनाडा तो अभी भी जाते हैं लेकिन ‘छोटी-मोटी’ नौकरी की तलाश में नहीं बल्कि घूमने के लिए.

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